Saturday, 30 April 2016

पाठ फ़ैलती चप्प्ले

पाठ से आपने क्या क्या सीखा संक्षेप मे लिखे |
शब्दो की लडी बनाये |
काम --- मटर ---रामू ---- मूरत ---- ----    -----     ------    -------

Thursday, 11 February 2016

'कोयल' पर एक और कविता पढे

काली कुरूप कोयल क्या राग गा रही है,
पंचम के स्वर सुहावन सबको सुना रही है।
इसकी रसीली वाणी किसको नहीं सुहाती?
कैसे मधुर स्वरों से तन-मन लुभा रही है।

इस डाल पर कभी है, उस डाल पर कभी है,
फिर कर रसाल-वन में मौजें उडा रही है।
सब इसकी चाह करते, सब इसको प्यार करते,
मीठे वचन से सबको अपना बना रही है।

है काक भी तो काला, कोयल से जो बडा है,
पर कांव-कांव इसकी, दिल को दु:खा रही है।
गुण पूजनीय जग में, होता है बस, ‘सनेही’,
कोयल यही सुशिक्षा, सबको सिखा रही है।



Thursday, 4 February 2016

कोयल कविता याद करे

किताब् मे कोयल कविता के शब्द अर्थ भी लिखे और कठिन शब्द याद करे

Monday, 1 February 2016

पाठ ' एक थी स्वति ' तैयार करे

पाठ को ध्यान से पढे और शब्द अर्थ भी याद करे