Saturday, 31 October 2015

'मौसम' पर एक कविता और पढ़िए


आई सर्दी आई
किट किट दांत बजाने वाली,आई सर्दी आई.भाग गये सब पतले चादर,निकली लाल रजाई.
दादा, दादी, नाना, नानी,सब सर्दी से डरते.धूप सेंकते, आग तापते,फिर भी रोज ठिठुरते.
कोट पहन कर मोटे वाला,पापा दफ्तर जाते.पहने टोपा, बांधे मफ्लर,सर्दी से घबराते.
मम्मी जी की हालत पतली,उल्टी चक्की चलती.हाथ पैर सब ठन्डे ठन्डे,मुँह से भाप निकलती.
लेकिन हमसब छोटे बच्चे,कभी नहीं घबराते,मस्ती करते हैं सर्दी में,दिन भर मौज मनाते.

Friday, 16 October 2015

Holiday Homework - to be done on A4 size sheets

दशहरा  एवं दुर्गा पूजा  क़ी आप सभी को सुभकामनाएँ
  1. दशहरा पर्व को देखकर उसका एक चित्र  बनाए  तथा उस पर पाँच वाक्य लिखें  अथवा  दुर्गा पूजा या कन्या पूजन  का चित्र चिपका कर उसपर पांच वाक्य  लिखे।
स्वरचित कविता को सुन्दर और आकर्षित तरीके से लिखे।

आपकी  सहायता  हेतु कुछ  पोस्टर  दिए  गए  हैं  :















Saturday, 3 October 2015

After reading the poem Nani ki nav chali , now read this lovely poem.

         नाव हमारी 
जल्दी जल्दी दौडे आओ,रंग बिरंगे कागज़ लाओ,सुन्दर सी एक नाव बनाकर,मिलजुल कर उसको तैराओ,खूब तेज चलती ये नाव,कभी थकती अपनी नाव,आगे आगे बढती जाती,कभी थकती अपनी नाव