Monday, 28 December 2015

घोषणा

विषय – हिन्दी            कक्षा – चौथी --शीतकालीन-गृहकार्य

१.       नव वर्ष के संदेश के साथ एक सुन्दर सा ग्रीटिग कार्ड बनाये और सजाये /

२.      भाषा माधुरी से ‘ कोयल’ कविता याद करें /

Sunday, 20 December 2015

पिछले सप्ताह करवाया गया कार्य

  • भाषा अभ्यास --व्याकरण सम्बन्धी अभ्यास करवाया गया |
  • अपठित गद्यांश का अभ्यास करवाया गया |

Thursday, 10 December 2015

पिछले सप्ताह् करवाया गया कार्य

  • पाठ  'एक थी स्वति ' भाषा अभ्यास में करवाया  गया 
  •   प्रश् नउत्तर करवाये गये
  • घोषणा
  • सोमवार को अपठित गदयन्श का TEST लिया जायेगा

Friday, 4 December 2015

पिछले सप्ताह् करवाया गया कार्य

  • पाठ  'एक थी स्वति करवाया'  गया 
  • शब्द अर्थ करवाये गये
  • घोषणा
  • बहादुरी के लिये दिये जाने वाले पुरुस्करो की सूची बनाये !


Friday, 27 November 2015

पिछले सप्ताह् करवाया गया कार्य एवं घोषणा

  •  कविता चतुर चित्रकार करवाई गयी|
  • शब्द- अर्थ करवाये गये |
  • प्रश्नोत्तर करवाये गये |
  • कक्षा में प्रतियोगिता के लिये कविता को याद करें |

Saturday, 31 October 2015

'मौसम' पर एक कविता और पढ़िए


आई सर्दी आई
किट किट दांत बजाने वाली,आई सर्दी आई.भाग गये सब पतले चादर,निकली लाल रजाई.
दादा, दादी, नाना, नानी,सब सर्दी से डरते.धूप सेंकते, आग तापते,फिर भी रोज ठिठुरते.
कोट पहन कर मोटे वाला,पापा दफ्तर जाते.पहने टोपा, बांधे मफ्लर,सर्दी से घबराते.
मम्मी जी की हालत पतली,उल्टी चक्की चलती.हाथ पैर सब ठन्डे ठन्डे,मुँह से भाप निकलती.
लेकिन हमसब छोटे बच्चे,कभी नहीं घबराते,मस्ती करते हैं सर्दी में,दिन भर मौज मनाते.

Friday, 16 October 2015

Holiday Homework - to be done on A4 size sheets

दशहरा  एवं दुर्गा पूजा  क़ी आप सभी को सुभकामनाएँ
  1. दशहरा पर्व को देखकर उसका एक चित्र  बनाए  तथा उस पर पाँच वाक्य लिखें  अथवा  दुर्गा पूजा या कन्या पूजन  का चित्र चिपका कर उसपर पांच वाक्य  लिखे।
स्वरचित कविता को सुन्दर और आकर्षित तरीके से लिखे।

आपकी  सहायता  हेतु कुछ  पोस्टर  दिए  गए  हैं  :















Saturday, 3 October 2015

After reading the poem Nani ki nav chali , now read this lovely poem.

         नाव हमारी 
जल्दी जल्दी दौडे आओ,रंग बिरंगे कागज़ लाओ,सुन्दर सी एक नाव बनाकर,मिलजुल कर उसको तैराओ,खूब तेज चलती ये नाव,कभी थकती अपनी नाव,आगे आगे बढती जाती,कभी थकती अपनी नाव

Friday, 4 September 2015

Apoem for you to read.


शिक्षक
मातायें देती नव जीवन,पिता सुरक्षा करते हैं.लेकिन सच्ची मानवता,शिक्षक जीवन में भरते हैं.सत्य न्याय के पथ पर चलना,शिक्षक हमें बताते हैं.जीवन संघर्षों से लड़ना,शिक्षक हमें सिखाते हैं.ज्ञान दीप की ज्योति जला कर,मन आलोकित करते हैं.विद्या का धन देकर शिक्षक,जीवन सुख से भरते हैं.शिक्षक ईश्वर से बढ़ कर हैं,यह कबीर बतलाते हैं.क्योंकि शिक्षक ही भक्तों को,ईश्वर तक पहुंचाते हैं.जीवन में कुछ पाना है तो,शिक्षक का सम्मान करो.शीश झूका कर श्रद्धा से तुम,बच्चों उन्हें प्रणाम करो.

Saturday, 29 August 2015

Enjoy this festival by reading this poem.


आज बेहन ने बड़े प्रेम से,रंग बिरंगा चौक बनाया.इसके बाद चौक के उपर,अपने भैया को बैठाया.रंग बिरंगी राखी बांधी,फिर सुन्दर सा तिलक लगाया.गोल गोल रसगुल्ला खा कर,भैया मॅन ही मॅन मुस्काया.ताल सजा कर डीप जला कर,भाई की आरती उतारी.मन्न ही मंन में केहटी बेहना,भैया रखना लाज हुमारी.करना सदा बेहन की रक्षा,भैया तुमको समझाता है.कच्चे धागों का ये बंधन,रक्षा बंधन केहलाता है