Saturday, 8 August 2015

After reading the lesson 'Daadi ka radio' you have learnt to respect and love your grandparents. Now read this poem and enjoy


मेरी प्यारी प्यारी दादी
मेरी प्यारी प्यारी दादी,सबसे सुंदर न्यारी.जो मैं कहता वो सुनती है,सारी बात हमारी.मुंह के भीतर दांत नहीं है.कुछ ऊँचा भी सुनती.दुबले पतले हाथों से वह,स्वेटर मेरा बुनती.छोटे छोटे कौर बना कर,मुझको सदा खिलाती.राजा रानी वाले किस्से,मुझको रोज सुनाती.मम्मी मुझे मारती है जब,दादी मुझे बचाती.बड़े प्यार से हाथ फेरती,अपने पास सुलाती.





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